गरीब दंपतियों की वृद्धावस्था पेंशन बहाली मोर्चा की बड़ी जीत: नेगी
बुधवार, 30 मार्च 2022
गरीब दंपतियों की वृद्धावस्था पेंशन बहाली मोर्चा की बड़ी जीत: नेगी
अंटार्कटिका और आर्कटिक पर प्रचण्ड गर्मी!
जलवायु परिवर्तन का असर
अंटार्कटिका और आर्कटिक पर प्रचण्ड गर्मी!
एजेंसी
नई दिल्ली। इस समय अंटार्कटिका में गर्मी का मौसम चल रहा है और आर्कटिक में गर्मी आ रही है। 21 मार्च को दोनों ही जगह दिन और रात बराबर थे, लेकिन मौसम कुछ ऐसा हुआ है कि दोनों ही जगह पर रेकार्ड तोड़ ग्रीष्म लहर चली है। अधिकतम तापमान औसत से 30 डिग्री ज्यादा पाया गया है। यूं तो वैज्ञानिक कहते रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन का असर ऐसे अचानक उछाल के रूप में दिखता रह सकता है, लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि धरती के दो सिरों पर एक ही वक्त तापमान एक साथ उछल गया? वैज्ञानिक इसे समझने की कोशिश कर रहे हैं।
अंटार्कटिका में में ग्रीष्म लहर आस्ट्रेलिया दक्षिण पूर्व में स्थिति तीव्र उच्च दबाव की धीमी प्रक्रिया के कारण आई, जिसमें भारी मात्रा में गर्म हवा और नमी अंटार्कटिका के आंतरिक इलाकों तक पहुंच गई। इसके साथ ही पूर्वी आंतरिक अंटार्कटिका में एक तीव्र कम दबाव की प्रणाली भी काम कर रही थी, फिर अंटार्कटिका के बर्फीले पठार के ऊपर के बादलों ने सतह से निकली गर्मी को फांस लिया था, जिसने आग में घी का काम किया।
पतझड़ से ही अंटार्कटिका के अंदर का तापमान इतना ज्यादा नहीं रहा था कि ग्लेशियर और बर्फ की परत पिघल जाती। फिर भी तापमान में बड़े उतार-चढ़ाव भी हो रहे थे। बीच पठार में -17 डिग्री के आसपास का तापमान था, जो औसत से 15 डिग्री ज्यादा था। उच्च पठार पर ही स्थित कोनकार्डा में मार्च का औसत तापमान 40 डिग्री सेल्सियस ऊपर तक दर्ज किया गया। अंटार्कटिका में तटीय इलाकों में बारिश कम होती है। ऐसा तभी होता है, जब तापमान बर्फ जमने वाले अंक से ऊपर हो जाता है तब वहां बर्फ गिरने की जगह बारिश होती है।
पिछले हफ्ते आस्ट्रेलियाई कैसे स्टेशन पर तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था, जो दो साल दूसरे ग्रीष्म लहर का मौका था। अंटार्कटिका के तटीय इलाकों में रहने वाले पेंगुइन हाल ही में गर्मी के प्रजनन से निपटे थे। राहत की बात यह है कि ग्रीष्म लहर से पहले ही उनके बच्चे समुद्र में खुद शिकार के लिए चले गए थे।
इसी तरह का मौसम पिछले सप्ताह आर्कटिक में देखने को मिला। अमेरिका के उत्तर पूर्वी तटीय इलाकों से तीव्र निम्न दबाव का तंत्र बनना शुरू हुआ और यहां एक उच्च दबाव का तंत्र भी बना। इससे आर्कटिक वृत्त में गर्म हवा का प्रवाह बना। नार्वे में अधिकतम तापमान 3.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने इस निम्न दबाव वाले तंत्र को ‘बांब साइक्लोन’ नाम दिया है, क्योंकि यह बहुत तेजी से बनता है।
इस साल आर्कटिक की सर्दियों में समुद्री बर्फ के हाल निचले स्तर के थे और ग्रीनलैंड में तो रेकार्ड बारिश दर्ज की गई थी। यदि गर्म हालात समुद्री बर्फ को सामान्य से पहले तोड़ देते हैं तो इसका बहुत से जीवों पर असर होता है। ध्रूवीय भालू को सील का शिकार करने लिए लंबा सफर करना पड़ता है। शिकार करने की संस्कृति प्रभावित होती है। वहीं नार्वे में फूल खिलने का मौसम जल्दी आने लगा है, क्योंकि गर्मी असामान्य रूप से पहले आने लगी है।
जलवायु परिवर्तन के दौर में एक ग्रीष्म लहर दूसरे का आधार बन सकती हैं। आर्कटिक दुनिया की तुलना में दोगुनी गति से गर्म हो रहा है, क्योंकि बर्फ पिघलने से सूर्य की रोशनी समुद्र में ज्यादा अवशोषित हो रही है। संयुक्त राष्ट्र के ‘इंटर गवर्नमेंटल पैनल आन क्लाइमेट चेंज’ का कहना है कि आर्कटिक में 2050 तक बर्फ रहित गर्मियां देखने को मिलने लगेंगी। ऐसा ही कुछ अंटार्कटिका में भी दिखेगा।
अंटार्कटिक पर मौसम में यह बदलाव इसलिए भी चौंकाने वाला है, क्योंकि इस वक्त वहां दिन लगातार छोटे होते जा रहे हैं और सर्दी बहुत अधिक होनी चाहिए। ठीक उसी वक्त आर्कटिक सर्दी से बाहर निकल रहा है। इसलिए कुछ वैज्ञानिकों ने कहा है कि एक साथ दोनों जगह एक जैसी घटना होना कल्पनीय भी नहीं है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये एकदम उलटे मौसम हैं। आप उत्तरी और दक्षिणी ध्रूव को एक साथ, एक समय पर पिघलते नहीं देखते। इन घटनाओं पर ला नीलो और अन्य मौसमी घटनाओं का कितना प्रभाव है, यह जानने के लिए गहन अध्ययन की जरूरत होगी।
मंगलवार, 29 मार्च 2022
आंसुओं के पीछे का विज्ञान
ज्यादा खुश होने पर भी भीग जाती हैं आंखें
आंसुओं के पीछे का विज्ञान
प0नि0डेस्क
देहरादून। जब भी हम ज्यादा खुश होते हैं तो कई बार हंसते-हंसते आंखों से आंसू छलकने लगते हैं। इसे आम बोलचाल के शब्दों में खुशी के आंसू भी कहा जाता है। आपको शायद आंसुओं के पीछे का विज्ञान नहीं पता! इन आंसुओं के पीछे का विज्ञान क्या है और आखिर ऐसा क्यों और कैसे होता है?
एक रिपोर्ट के अनुसार हंसते-हंसते रोने यानी आंसू निकलने के पीछे दो कारण हैं। पहला कारण यह है कि जब हम खुलकर हंसते हैं तो हमारे चेहरे की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से काम करने लगती हैं। ऐसा होने पर हमारी अश्रु ग्रंथियों से भी दिमाग का नियंत्रण हट जाता है और आंसू निकल पड़ते हैं।
इसकी दूसरी वजह मानी जाती है कि बहुत ज्यादा हंसने की स्थिति में व्यक्ति भाव-विभोर हो जाता है। ज्यादा भावुक होने के कारण चेहरे की कोशिकाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है जिसके चलते आंसू निकाल जाते हैं। ऐसा करके हमारा शरीर आंसुओं के जरिए हमारे तनाव को संतुलित करने की कोशिश करता है।
दरअसल ये पूरी प्रक्रिया हर शख्स के लिए अलग-अलग हो सकती है। कई लोग कम रोते हैं तो वहीं कई लोग बहुत जल्दी भावुक हो जाते हैं। साथ ही महिला या पुरुष होने से भी इस पूरी प्रक्रिया पर फर्क आ जाता है। माना जाता है महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक भावुक होती हैं। ऐसे में महिलाओं के साथ हंसते-हंसते आंसू निकलने की संभावना अधिक पाई जाती है।
कम या ज्यादा भावुक होने के पीछे मुख्य भूमिका हार्माेन की होती है। हंसने में दिमाग का जो हिस्सा सक्रिय होता है, रोने पर भी वही सक्रिय होता है। लगातार हंसने या रोने की स्थिति में दिमाग की कोशिकाओं पर अधिक तनाव पड़ता है। ऐसे में शरीर में कार्टिसोल और एड्रिनालाइन नामक हार्माेन्स का स्त्राव होता है। यही हार्माेन्स हंसते या रोते वक्त शरीर में होने वाली विपरीत प्रतिक्रिया के लिए जिम्मेदार होते हैं।
गौरतलब है कि हंसने और रोने पर खुशी का पहला आंसू दाहिनी आंख से आता है और दुःख का पहला आंसू बायीं आंख से छलकता है।
अमरनाथ यात्रा का 30 जून से शुभारम्भ
अमरनाथ यात्रा का 30 जून से शुभारम्भ
एजेंसी
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में हर साल होने वाली अमरनाथ यात्रा इस बार 30 जून से शुरू होगी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। दक्षिण कश्मीर स्थित हिमालयी क्षेत्र में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा में हिमलिंग के दर्शन के लिए 43 दिन तक चलने वाली इस यात्रा के संबंध में अमरनाथ श्राइन बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक की अध्यक्षता उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने की।
उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से किए गए ट्वीट में बताया गया कि 43 दिवसीय पवित्र तीर्थयात्रा कोरोना के सभी नियमों का पालन करते हुए 30 जून से शुरू होगी और इसका समापन परंपरा के अनुरूप रक्षा बंधन के दिन होगा। हमने आगामी तीर्थयात्रा से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर गहराई से विचार-विमर्श किया है।
अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को समाप्त किए जाने के कारण उस वर्ष अमरनाथ यात्रा बीच में ही रद्द कर दी गई थी, जबकि कोरोना महामारी के कारण दो साल 2020 और 2021 में सांकेतिक यात्रा की ही अनुमति दी गई थी। इन दोनों साल के दौरान पवित्र गुफा में वैदिक परंपरागत विधि से बाबा बर्फानी की पूजा जारी थी।
श्राइन बोर्ड की ओर से बताया गया कि यात्रा के लिए दो अप्रैल से पंजीकरण शुरू किया जाएगा। एक दिन में केवल 20 हजार लोगों का ही पंजीकरण किया जाएगा। इसके अलावा यात्रा के दौरान भी काउंटर पर जाकर पंजीकरण कराया जा सकेगा।
जियो ने कैलेंडर महीने की वैधता वाली रिचार्ज योजना पेश की
जियो ने कैलेंडर महीने की वैधता वाली रिचार्ज योजना पेश की
एजेंसी
नयी दिल्ली। देश की सबसे बड़ी दूरसंचार सेवा प्रदाता रिलायंस जियो ने अपने प्रीपेड उपभोक्ताओं के लिए 259 रुपये में एक कैलेंडर महीने की वैधता वाली रिचार्ज योजना पेश की है।
जियो कैलेंडर महीने की वैधता वाली प्रीपेड योजना लेकर आने वाली पहली दूरसंचार कंपनी है। जियो की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 259 रुपये की यह रिचार्ज योजना 1.5जीबी दैनिक डेटा और असीमित कालिंग सुविधाओं के साथ आती है। इसकी वैधता पूरे एक कैलेंडर महीने की है, फिर चाहे महीने में 30 दिन हों या 31 दिन।
कंपनी ने कहा कि इस तरह एक वर्ष में रिचार्ज की संख्या केवल 12 होगी और योजना हर महीने की उसी तारीख को दोहराई जाती है जिस तारीख पर पहली बार रिचार्ज किया गया हो।
साल की शुरुआत में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने दूरसंचार कंपनियों को 30 दिन की वैधता के साथ प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज योजना देने को कहा था।
कश्मीरी पंडितों पर हुए जुल्म को नरसंहार माना
आईसीएचआरएफ ने कश्मीरी पंडितों पर हुए जुल्म को नरसंहार माना
कश्मीरी पंडितों के दोषियों को सख्त सजा देने का आह्वान
एजेंसी
वाशिंगटन। अमेरिका स्थित गैर-लाभकारी, मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अंतर्राष्ट्रीय आयोग (आईसीआरआरएफ) ने भारत सरकार और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर की सरकार से कश्मीरी हिंदुओं पर 1989-1991 के अत्याचारों को एक नरसंहार के रूप में स्वीकार करने और मान्यता देने का आह्वान किया है। आयोग अन्य मानवाधिकार संगठनों, अंतर्राष्ट्रीय निकायों और सरकारों को इस दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करता है और आधिकारिक तौर पर इन अत्याचारों को नरसंहार के कार्य के रूप में स्वीकार करता है। इसमें कहा गया है कि दुनिया को इन कहानियों को सुनना चाहिए, उनकी पिछली चुप्पी और राजनीतिक औचित्य से निष्क्रियता के प्रभाव पर गंभीरता से आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और उचित मान्यता देनी चाहिए।
आईसीएचआरएफ ने कश्मीरी पंडितों पर हुए जुल्म को नरसंहार माना है और इसमें शामिल दोषियों को सख्त सजा देने का आह्वान किया है। आईसीएचआर ने इसे कश्मीरी हिन्दुओं का नरसंहार माना है और कहा है कि यह जातीय और सांस्कृतिक नरसंहार था।
मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अंतर्राष्ट्रीय आयोग एक यूएस आधारित गैर-लाभकारी संस्था है जो निरंतर निगरानी, नीति हस्तक्षेप और सहयोग के माध्यम से मानव अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता को बनाए रखने पर केंद्रित है। आईसीएचआरआरएपफ ने 27 मार्च 2022 को कश्मीरी हिंदू नरसंहार (1989-1991) के मुद्दे पर एक विशेष जन सुनवाई की, जिसके दौरान जातीय और सांस्कृतिक सफाई के कई पीड़ितों और बचे लोगों ने शपथ के तहत गवाही दी और साक्ष्य प्रस्तुत किए।
हजारों वर्षाे तक एक स्वदेशी धार्मिक अल्पसंख्यक के रूप में शांतिपूर्वक रहने के बाद इन कश्मीरी हिंदुओं से मदद की गुहार विश्व स्तर पर बहरे कानों पर पड़ी। हालांकि यह एक हद तक अपेक्षित था कि प्रत्येक राष्ट्र और मीडिया आउटलेट चुनता है कि वे वैश्विक घटनाओं से संबंधित क्या और कितनी रिपोर्ट करते हैं, यह बेहद दर्दनाक था जब राजनेताओं, पड़ोसियों, दोस्तों, सहपाठियों और स्थानीय पुलिस ने आंखें मूंद लीं।
निकाय ने भविष्य में होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार और जातीय नरसंहार की जांच के लिए एक आयोग की नियुक्ति की भी मांग की। उनकी मांग में अपराधियों और उनके समर्थकों को कानूनी रूप से जवाबदेह ठहराना शामिल है। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर कश्मीरी हिंदू परिवारों की दुर्दशा को कम करने के लिए सरकारी वित्तीय सहायता कार्यक्रमों और एक कश्मीरी हिंदू होलोकास्ट संग्रहालय स्थापित करने की अनुमति की भी मांग की है।
सोमवार, 28 मार्च 2022
वायुसेना के जवानों को मिलिट्री कोर्ट से बड़ी राहत
वायुसेना के जवानों को मिलिट्री कोर्ट से बड़ी राहत
जवानों का यूपीएससी पास कर अधिकारी बनने का रास्ता साफ
एजेंसी
नई दिल्ली। सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने वायुसेना के जवानों के लिए बड़ा फैसला सुनाया है, जिसके बाद अब वायुसेना के जवानों को यूपीएससी परीक्षाओं में शामिल होने और सिविल सेवा अधिकारी बनने से कोई नहीं रोक पाएगा। सैन्य अदालत ने भारतीय वायुसेना से यूपीएससी परीक्षा पास करने वाले जवान को नौकरी छोड़ने और सिविल सेवा अधिकारी के रूप में शामिल होने की अनुमति देने को कहा है।
ऐसे मामले में जहां भारतीय वायु सेना के अधिकारी यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षाओं और राज्य स्तरीय सिविल सेवा परीक्षाओं को पास करने वाले जवानों को नौकरी छोड़ने और प्रथम श्रेणी के अधिकारी के रूप में शामिल होने की अनुमति नहीं दे रहे थे। उनको सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने भारतीय वायुसेना को दो हफ्रते के भीतर उन्हें छोड़ने और सिविल सेवा में शामिल होने के लिए कहा है।
जस्टिस राजेंद्र मेनन की अध्यक्षता में सशस्त्र बल न्यायाधिकरण की प्रधान पीठ ने भी भारतीय वायु सेना को बल के बाहर ग्रेड ए सेवा परीक्षा के लिए आवेदन करने के लिए वायु योद्वाओं को अनुमति देने के लिए अपने नियमों और शर्तों को बदलने के लिए कहा है। यह मामला कार्पाेरल आयुष मौर्य और सार्जेंट कुलदीप विभूति ने अपने वकील अंकुर छिब्बर के माध्यम से दायर किया था, क्योंकि मौर्य ने 2021 के लिए यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की है, जबकि विभूति ने बिहार सरकार की राज्य स्तरीय परीक्षा उत्तीर्ण की है।
याचिका में छिब्बर ने बताया कि उनके मुवक्किल ने कहा था कि उन्होंने अनुमति के लिए आनलाइन आवेदन करने की कोशिश की, लेकिन ऐसा नहीं कर सके क्योंकि केवल उन्हीं कर्मियों को अनुमति दी जाती है, जिनके पास कौशल ग्रेड में ‘ए’ श्रेणी है। हालांकि उन्होंने अपनी परीक्षाएं दीं और उन्हें पास कर लिया और उन्हें पिछले साल दिसंबर में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में शामिल होना था। हालांकि उन्होंने एक आफलाइन आवेदन दायर करने के बाद आईएएफ द्वारा यह कहते हुए अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं दिया कि कार्पाेरल ने नागरिक नौकरी के लिए पूर्व अनुमति नहीं मांगी थी।
अपनी दलीलों में वकील छिब्बर ने अदालत को बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले ही असैन्य क्षेत्र में नौकरियों के लिए कर्मियों को आवेदन करने की अनुमति देने के लिए कौशल ग्रेड ए की आवश्यकता को अनुचित मानते हुए रद्द कर दिया है, जिस पर सैन्य अदालत ने कहा कि वह दोनों दलीलों को सही मानते हुए प्रतिवादियों को आदेश देती है कि दो हफ्रते के भीतर दोनों आवेदकों को जरूरी एनओसी जारी कर दी जाए। साथ ही दोनों आवेदकों को जरूरी निर्वहन का आदेश भी दिया जाता है।
रविवार, 27 मार्च 2022
दूनवासियों को रिस्पना नदी की दुर्दशा के बारे मे जागरूक किया
एक मुलाकात रिस्पना से नाम से मैड शुरू किया जागरूकता अभियान
संवाददाता
देहरादून। मेकिंग अ डिफरेंस बाय बीइंग द डिफरेंस (मैड) ने रिस्पना नदी के किनारे ‘एक मुलाकात रिस्पना से’ ट्रेकिंग श्रृंखला की शुरुआत करते हुए अपने रिस्पना नदी कायाकल्प जागरूकता कार्यक्रम को जारी रखा। ट्रेकिंग के माध्यम से मैड संस्था का उद्देश्य रिस्पना की मौजूदा स्थिति, नदी की विविधता और रहवासी क्षेत्रों में दूषित होने के कारणों को समझ उसका दस्तावेजीकरण करना है।
एक दर्जन से अधिक छात्रों और स्वयंसेवकों ने पुराना राजपुर क्षेत्र से होते हुए नदी के ऊपरी तटवर्ती क्षेत्र में ट्रेकिंग श्रृंखला का आरंभ किया। ट्रैकिंग के दौरान सदस्यों ने शहंशाही आश्रम से लेकर काठबांग्ला क्षेत्र का भ्रमण पूरा किया तथा इस साप्ताहिक ट्रैकिंग के द्वारा मैड संस्था का उद्देश्य रिस्पना के सभी क्षेत्रों कवर करना है।
गौरतलब है कि वर्ष 2011 से ही देहरादून की पर्यावरण प्रेमी संस्था मेकिंग अ डिफरेंस बाय बीइंग द डिफरेंस (मैड) रिस्पना पुनर्जीवन के लिए निरंतर कार्यरत रही है। पूर्व में मैड संस्था द्वारा रिस्पना को फिर से जीवंत करने के लिए उत्तराखंड के मुख्य सचिव की अगुवाई में उच्चाधिकार प्राप्त समिति के समक्ष एक विशेष रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी जिसके माध्यम से 2014 में नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हाइड्रोलाजी रुड़की द्वारा रिस्पना नदी में सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की गई थी, जिसमें रिस्पना नदी को एक बारहमासी धारा के रूप में चिह्नित किया था और आगे शोध जारी रखने तथा रिस्पना नदी के कायाकल्प को आरंभ करने हेतु एक संक्षिप्त रोडमैप तैयार किया गया था। मैड संस्था इस रिपोर्ट पर विचार और कार्यान्वयन की निरंतर मांग करती आई है।
मैड संस्था ने यह भी सुझाव दिया था कि चूंकि पर्यावरण और वन मंत्रालय ने स्वीकार किया था कि रिस्पना और बिंदाल गंगा नदी बेसिन का एक हिस्सा हैं, इसलिए उनका पुनरुद्वार नमामि गंगे कार्यक्रम के एक अभिन्न अंग के रूप में किया जाना चाहिए। वर्ष 2018 में त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के कार्यकाल के दौरान मैड द्वारा रिस्पना पुनर्जीवन अभियान के चलते सीएम हाउस में ‘रिस्पना रिटंर्स’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। ऐसे ही संस्था द्वारा रिस्पना नदी पर समय-समय पर रिस्पना वाक व सपफाई अभियान भी आयोजित किये गये हैं। हालांकि करोना काल के दौरान यहां गतिविधियां निरंतर जारी रखना कठिन रहा।
ट्रेकिंग को आगे बढ़ाते हुए सदस्यों को अभियान की विशिष्ट नीतियों से अवगत कराया गया। विशेष रूप से नए सदस्यों के लिए यह जीवंत रिस्पना नदी से पहले परिचय जैसा था जिसे शहर में मृत माना जाता है। ट्रेक के दौरान सदस्यों ने चारों ओर पफैले प्लास्टिक के कचरे की समस्या को देखते हुए युवाओं के बीच आकर एक गहन जागरूकता अभियान शुरू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रिस्पना नदी आने वाले समय में इस स्थिति में न रहे। इस ट्रेक के दौरान सदस्यों ने रिस्पना नदी और जल दूषित करने वाले पदार्थों की जमीनी स्थिति को समझने की कोशिश की।
मैड संस्था ने आने वाले प्रत्येक सप्ताह में रिस्पना उन्मुख गतिविधियों को जारी रखने की योजना बनाई है, ताकि रिस्पना पुनर्जीवन अभियान को न केवल सक्रिय नागरिक सहयोग के साथ बल्कि सक्रिय युवा भागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जाए।
संस्था की सप्ताहिक एक्टिविटी रिस्पना ट्रेक 1 सुबह 6ः30 बजे शुरू होकर 11ः30 बजे तक जारी रही। इस अभियान के दौरान देवयश, आर्यन, शार्दुल, दिव्यांशी, अग्रिमा, कार्तिकेय, दारिश, सौरभ, यश, आशुतोष, आदि सदस्य मौजूद रहे।
संस्कृत भाषा में शपथ लेने पर अग्रवाल का सम्मान
संस्कृत भाषा में शपथ लेने पर अग्रवाल का सम्मान
स्पोटर्स कॉलेज में विभिन्न जनपदों में कक्षा-6 में प्रवेश हेतु चयन ट्रायल्स का आयोजन
स्पोटर्स कॉलेज में विभिन्न जनपदों में कक्षा-6 में प्रवेश हेतु चयन ट्रायल्स का आयोजन
संवाददाता
देहरादून। प्रधानाचार्य महाराणा प्रताप स्पोटर्स कॉलेज रायपुर राजेश मंमगाई ने अवगत कराया है कि आगामी सत्र 2022-23 हेतु महाराणा प्रताप स्पोर्टस कॉलेज में बालकों हेतु 8 खेल (एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, बैडमिन्टन, फुटबाल, क्रिकेट, हॉकी, वॉलीबाल, जूडो) एवं हरि सिंह थापा स्पोर्टस कॉलेज पिथौरागढ़ में 3 खेल (एथलेटिक्स, बॉक्सिंग एवं फुटबाल) उत्तराखण्ड राज्य के विभिन्न जनपदों में कक्षा-6 में प्रवेश हेतु चयन ट्रायल्स आयोजित कराये जा रहें है।
उन्होंने बताया कि एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, बैडमिन्टन, फुटबाल, क्रिकेट, हॉकी, वॉलीबाल, जूडो हेतु प्रवेश के लिए प्रथम चरण में चयन स्थल स्पोर्टस स्टेडियम काशीपुर में 4 अप्रैल, स्पोर्टस स्टेडियम रूद्रपुर में 5 अप्रैल, स्पोर्टस स्टेडियम टनकपुर में 6 अप्रैल, स्पोर्टस स्टेडियम चम्पावत में 7 अप्रैल, स्पोर्टस स्टेडियम पिथौरागढ़ में 8 अप्रैल, स्पोर्टस स्टेडियम बागेश्वर में 9 अप्रैल, स्पोर्टस स्टेडियम अल्मोड़ा में 10 अप्रैल, स्पोर्टस स्टेडियम हल्द्वानी में 11 अप्रैल, स्पोर्टस स्टेडियम रामनगर में 12 अप्रैल तथा द्वितीय चरण में स्पोर्टस स्टेडियम पुरोला में 15 अप्रैल को चयन ट्रायल्स आयोजित होंगे।
वहीं स्पोर्टस स्टेडियम उत्तरकाशी में 16 अप्रैल, स्पोर्टस स्टेडियम नई टिहरी में 17 अप्रैल, स्पोर्टस स्टेडियम पौड़ी गढ़वाल में 18 अप्रैल, स्पोर्टस स्टेडियम गोपेश्वर (चमोली) में 19 अप्रैल, स्पोर्टस स्टेडियम अगस्त्यमुनि (रूद्रप्रयाग) में 20 अप्रैल तथा तृतीय चरण में स्पोर्टस स्टेडियम कोटद्वार में 22 अप्रैल, स्पोर्टस स्टेडियम हरिद्वार में 23 अप्रैल एवं स्पोर्टस स्टेडियम दून में 24 अप्रैल को निर्धारित समय प्रातः 8 बजे से हैं।
अन्तिम चयन ट्रायॅल्स महाराणा प्रताप स्पोर्टस कॉलेज रायपुर देहरादून में आयोजित किया जाएगा जिसमें एथलेटिक्स/हॉकी के लिए 27 एवं 28 अप्रैल, फुटबाल/जूडो के लिए 29 एवं 30 अप्रैल, बैडमिन्टन/वालीबाल के लिए 1 एवं 2 मई व क्रिकेट/बॉक्सिंग के लिए 3 एवं 4 मई को निर्धारित ट्रायल्स समय प्रातः 7 बजे से है।
रक्तवीर अनिल वर्मा का राज्य एवं जिला स्तर पर समाज सेवा हेतु सम्मान
रक्तवीर अनिल वर्मा का राज्य एवं जिला स्तर पर समाज सेवा हेतु सम्मान
संवाददाता
देहरादून। विश्व टीबी दिवस पर समाज सेवी अनिल वर्मा को राज्य स्तर पर राजपुर रोड स्थित होटल अजंता में मुख्य अतिथि चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग उत्तराखंड की निदेशक डा0 शैलजा भट्ट, स्टेट टीबी आफीसर डा0 एसके झा, दून मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा0 आशुतोष सयाना ने तथा जिला स्तर पर हरिद्वार रोड स्थित होटल एमजे रेजीडेंसी में मुख्य अतिथि विधायक व पूर्व मेयर विनोद चमोली, स्टेट टीबी आफीसर डा0 एसके झा, सीएमओ डा0 मनोज उप्रेती तथा वरिष्ठ जिला क्षय रोग अधिकारी डा0 मनोज वर्मा ने टीबी उन्मूलन जागरूकता कार्यक्रम सहित समाज सेवा में उल्लेखनीय योगदान हेतु विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर अनेक वरिष्ठ चिकित्सक, कार्यक्रम संचालक व स्टेट आईसी अधिकारी अनिल सती तथा डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम कोओर्डिनेटर अंकुर नेगी एन0जी0ओ0 सहित नर्सेज, सैकड़ों छात्रा-छात्राएं व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
शनिवार, 26 मार्च 2022
मिलीभगत से देर रात भू-माफियाओं ने जेसीबी से तोड़ी दुकानें!
बीच शहर में भू माफियाओं का तांडवः नेहरू कालोनी पुलिस की भूमिका पर सवाल
मिलीभगत से देर रात भू-माफियाओं ने जेसीबी से तोड़ी दुकानें!
संवाददाता
देहरादून। किसी फिल्मी सीन की तरह कल रात 25 मार्च को रिस्पना पुल के समीप नेहरू कालोनी थाने से महज 200 मीटर की दूरी पर लाइफलाइन अस्पताल के सामने हरिद्वार रोड़ पर जो भू माफियाओं ने तांडव मचाया, वो कल्पना से परे है। रात करीब 11ः45 बजे के आसपास जेसीबी, डंपर और इनोवा गाड़ी में बदमाश आये और बीच शहर सड़क किनारे स्थित 6 दुकानों को तहस नहस कर गए। घटना के समय वहीं पास में एक एसआई 4 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी नेहरू कालोनी पुलिस की भूमिका को सवाल के घेरे में खड़ा कर रही है। हालांकि बाद में उन्होंने हस्तक्षेप कर पांच आरोपियों को पकड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक 25 मार्च को रात करीब 11ः45 बजे कथित तौर पर डाक्टर बंगारी, उसके बेटे के साथ करीब दर्जन भर बदमाश जेसीबी और डंपर लेकर इनोवा कार से घटनास्थल पर आये। उन्होंने सड़क किनारे बनी 6 दुकानों पर जेसीबी चलाना शुरू कर दिया। इस बीच जब इसकी जानकारी दुकानदारों को हुई तो उन्होंने इसका लोगों ने विरोध किया। भू माफियाओं द्वारा अवैध असलहे लहराये गए और पथराव भी किया गया। इस बीच उनकी जेसीबी खराब हो गयी और भू माफिया उसे छोड़कर भाग गए। इस दौरान घटनास्थल के निकट मौजूद पुलिसकर्मी कारवाई करने से बचते दिखे। बाद में लोगों के विरोध करने पर उन्होंने भू माफियाओं पर कारवाई की और जानकारी के अनुसार पांच आरोपियों को हिरासत में लिया गया। इससे नेहरू कालोनी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे है।
पीड़ित लोगों ने पुलिस पर आरोप लगाये कि उनकी मिलीभगत के कारण ही भू माफियाओं का दुःसाहस इतना बढ़ा कि उन्होंने इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे दिया। खुलेआम पिस्टल लहराया गया। बताया जा रहा है कि बदमाशों ने शराब पी रखी थी, ऐसे में कोई हादसा हो जाता या किसी की जान चली जाती तो उसका जिम्मेदार कौन होता? पीड़ित दुकानदारों में अंजुम, दलजीत, रईस, वकीम अहमद, सोनू, किशोर और गुरूमीत शामिल है। इन दुकानदारों का लाखों का सामान बर्बाद हो गया। सबसे ज्यादा किशोर का करीब 32 लाख की मशीनें कबाड़ हो गई, लेपटाप टूट गए। इसी तरह लाखों का नुकसान इन दुकानदारों का हो गया।
बताया जा रहा है कि वहां पर स्थित जमीन इन दिनों सुर्खियों में है। आवास विकास के स्वामित्व वाली उक्त जमीन पर कुछ स्थानीय लोगों का वाद चल रहा है। वहां पर करीब 30-35 सालों से कई दुकानदार भी काबिज है। हाल ही में उक्त जमीन के कथित स्वामी ने जमीन का कुछ हिस्से को भू माफियाओं को बेचा है। ये लोग ऐसी विवादित जमीन को औने-पौने दामों पर खरीद कर उसे खाली कराकर बेचने का काम करते है। अक्सर इसी तरह गुंडई करके जमीन खाली करायी जाती है। जानकारी के अनुसार ऐसी ही जमीन पर एक तो नक्शा पास कराकर कई मंजिला निर्माण भी करा चुका है। जबकि उक्त जमीन के खातेदार में आवास विकास का नाम दर्ज है।
जानकारी के अनुसार रात को भू माफियाओं एवं उनके साथ आये बदमाशों ने विरोध करने पर लखविन्दर सिंह, जसवीर सिंह और श्रीमती दीपा कौर के साथ हाथापाई और मारपीट की। हैरानी की बात है कि वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने भी उन पर दबाव बनाने का प्रयास किया। लोगों के कड़े विरोध के बाद ही पुलिसकर्मी आरोपियों को पकड़ने को मजबूर हुई। लोगों का आरोप है कि पुलिस ने जानबूझ कर आरोपियों पर हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है जिससे उनकेी मिलीभगत का संदेह होता है।
इस प्रकार की घटनाओं का होना प्रदेश सरकार और पुलिस व्यवस्था पर सवालिया निशान है। क्योंकि आरोप लग रहें है कि पुलिस की मिलीभगत के बिना भू माफिया ऐसा दुःसाहस नहीं कर सकते है। वहीं घटना के वक्त करीब एक घंटे तक बिजली का गूल रहना भी साबित करता है कि यह दुकानों को हटाने की पूर्व निर्धारित योजना थी। जिसके लिए भू माफियाओं ने पुलिस से लेकर बिजली विभाग तक के भ्रष्ट लोगों से सांठगांठ कर रखी थी। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलापफ सख्त कारवाई हो ताकि आगे कोई भी भू माफिया और भ्रष्ट कर्मचारी इस तरह की हिमाकत न कर सके।
वायरल बॉय प्रदीप मेहरा की माँ के इलाज के लिए मदद
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अमित जानी ने दिया 1 लाख का चेक
उत्तराखंड विधान सभा की पहली महिला स्पीकर बनी ऋतु खंडूड़ी भूषण
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‘एक देश, एक मतदाता सूची’ और आनलाइन मतदान प्रणाली पर विचार कर रही सरकारः रीजीजू
‘एक देश, एक मतदाता सूची’ और आनलाइन मतदान प्रणाली पर विचार कर रही सरकारः रीजीजू
एजेंसी
नयी दिल्ली। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि देश में फर्जी मतदान को रोकने के लिए सरकार ‘एक देश, एक मतदाता सूची’ की अवधारणा पर विचार कर रही है और आनलाइन मतदान प्रणाली पर भी विचार चल रहा है। रीजीजू ने लोकसभा में प्रश्नकाल में सदस्यों के पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए यह बात कही।
भाजपा के अजय निषाद के पूरक प्रश्न के उत्तर में कानून मंत्राी ने कहा कि पूरे देश में फर्जी मतदान को रोकने के लिए सभी राज्यों एवं केंद्रशासित राज्यों के लिए केवल एक ही मतदाता सूची लाने का विचार है।
उन्होंने कहा कि हमने निर्वाचन आयोग से इस संबंध में बात की है। पिछले दिनों मतदाता सूची को आधार के साथ लिंक करने का प्रावधान रखा गया है। यह अभी अनिवार्य नहीं, स्वैच्छिक है। लेकिन इससे फर्जी मतदान रुकने में सफलता की संभावना है। रीजीजू ने कहा कि आगे भी चुनाव सुधार के लिए जरूरी कदम उठाएंगे। ‘एक देश, एक मतदाता सूची’ हो, ऐसी सरकार की सोच है। देश में साफ-सुथरी मतदान प्रणाली होनी चाहिए।
प्रवासी भारतीयों को मताधिकार देने के एक पूरक प्रश्न के जवाब में मंत्री ने कहा कि यह सकारात्मक सुझाव है। उन्होंने कहा कि हमने निर्वाचन आयोग से इस संबंध में बात की है। रीजीजू ने कहा कि आनलाइन मतदान प्रणाली को कैसे प्रोत्साहित किया जा सकता है, इस पर विचार कर रहे हैं। लेकिन किसी भी घोषणा से पहले उसकी पारदर्शिता, सुरक्षा और उससे किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका को ध्यान में रखना होगा।
कांग्रेस के मनीष तिवारी ने देश में कम मतदान होने पर चिंता जताते हुए मतदान प्रतिशत बढ़ाने के विषय पर सदन में विशेष चर्चा कराने का सुझाव देते हुए मंत्री से पूछा कि ईवीएम बनने के बाद उसका सोर्स कोड निर्वाचन आयोग के पास रहता है या ईवीएम मशीन निर्माता कंपनी के पास? इस पर जवाब देते हुए रीजीजू ने जवाब में केवल इतना कहा कि जिस तरह न्यायाधीशों की नियुक्ति सरकार करती है, लेकिन नियुक्ति के बाद वे स्वतंत्र हो जाते हैं, उसी तरह ईवीएम बनने के बाद उनका नियंत्रण निर्वाचन आयोग के पास रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईवीएम पर कोई सवाल नहीं उठना चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि मैं विश्व के कई देशों में गया हूं। मैं कह सकता हूं कि दुनिया में सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत है जहां निर्वाचन आयोग अनेक आम चुनाव के अंतर्गत करोड़ों लोगों के मतदान की व्यवस्था करता है। इसके लिए लोकतंत्र को बधाई दी जानी चाहिए। इतना बड़ा तंत्र मैंने कहीं नहीं देखा। रीजीजू ने कहा कि केवल निर्वाचन आयोग ही नहीं, सबका प्रयास है कि देश में मतदान प्रतिशत अधिक से अधिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेशों से लोग हमारे यहां चुनाव प्रक्रिया देखने और सीखने आते हैं।
शुक्रवार, 25 मार्च 2022
सपनों की उड़ान कार्यक्रम में बच्चों ने दिखाई प्रतिभा
सपनों की उड़ान कार्यक्रम में बच्चों ने दिखाई प्रतिभा
गुरुवार, 24 मार्च 2022
रोडवेज की संचालित बसोें में से 326 संचालन से बाहर, 135 बसों की कमी
रोडवेज की संचालित बसोें में से 326 संचालन से बाहर, 135 बसों की कमी
उत्तराखंड परिवहन निगम मुख्यालय द्वारा आरटीआई के तहत उपलब्ध करायी सूचना से खुलासा
संवाददाता
काशीपुर। रोडवेज यात्रियों को बेहतर सुुविधाएं देेने के कितने भी दावे करें लेकिन वास्तविकता में उसके बेड़े में शामिल बसों में कमी की जा रही है। स्थिति तो यहां तक हैै कि 2021 व 2022 में 5 मार्च तक कोई नई बस रोडवेज में संचालन हेतु शामिल नहीं की गयी हैै, यात्री 10 वर्षाेें से अधिक पुरानी 29 बसों में भी यात्रा करने को मजबूर है। यह खुलासा सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीमउद्दीन (एडवोकेट) को उत्तराखंड परिवहन निगम मुुख्यालय द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना से हुुआ।
काशीपुुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन (एडवोकेट) ने परिवहन निगम मुख्यालय के लोक सूचना अधिकारी से निगम में संचालित पुरानी व नई बसों की सूचना मांगी थी। इसके उत्तर में पत्रांक 52 दिनांक 5 मार्च 2022 से लोक सूूचना अधिकारी/सहायक महाप्रबंधक (तकनीकी) भूूपेश आनन्द कुशवाह ने महाप्रबंधक (संचालन) दीपक जैन द्वारा हस्ताक्षरित बसोें संबंधी विवरण की प्रति उपलब्ध करायी। परिवहन निगम द्वारा जनवरी 2020 से सूूचना उपलब्ध कराने की तिथि 5 मार्च 2022 तक कुल 326 बसंे संचालन से बाहर की गयी हैै इसमें 237 टाटा बसंेे, 88 ली-लैैण्ड तथा 1 आईशर बस शामिल हैै। इस अवधि में 2021 व 2022 में कोई नई बस शामिल नहीं की जबकि इस अवधि में 2020 माडल की केवल 191 बसें ही शामिल की गयी है।
उपलब्ध सूचना के अनुसार उत्तराखंड रोडवेज में वर्तमान में 29 बसेें 10 वर्ष से पुुरानी संचालित हैै जिसमें सर्वाधिक रूद्रपुर में 7, ऋषिकेश व हरिद्वार डिपो में 5-5, काठगोदाम में 6, हल्द्वानी में 1, देहरादून ग्रामीण में 2 तथा टनकपुर डिपो की 3 बसेे शामिल हैै। इसके अतिरिक्त 5 वर्ष से 10 तक पुुरानी 645 बसें संचालित हैैं। जिसमें सर्वाधिक 72 देहरादून पर्वतीय व 67 टनकपुुर डिपो में, सबसे कम 9 श्रीनगर डिपो में शामिल हैै। अन्य डिपो में काशीपुर व रूड़की में 20-20, अल्मोड़ा व कोटद्वार में 33-33, रानीखेत व भवाली में 24-24, )षिकेश व हरिद्वार में 35-35, काठगोदाम में 47, हल्द्वानी में 49, रामनगर में 36, रूद्रपुर व लोहाघाट में 26-26, देहरादून ग्रामीण में 40 तथा पिथौैरागढ़ डिपो में 49 बसेे संचालित है।
5 वर्ष से कम पुरानी संचालित बसों की उपलब्ध सूचना के अनुसार ऐसी कुल 313 बसों में सर्वाधिक 35 देहरादून ग्रामीण डिपो तथा सबसे कम 5 बसें रानीखेत डिपो में संचालित हैै। जबकि अन्य डिपो में काशीपुर, कोटद्वार व पिथौैरागढ़ में 19-19, अल्मोड़ा, लोहाघाट व रूड़की में 10-10, काठगोदाम में 24, ऋषिकेश में 22, हल्द्वानी में 23, रामनगर में 14, देहरादून पर्वतीय में 17, हरिद्वार व रूद्रपुर में 20-20, भवाली में 7 व टनकपुर में 29 बसें शामिल है।
उपलब्ध सूचना के अनुसार नई बसंे 2020 माडल की कुल 191 बसों में से सर्वाधिक 35 देहरादून ग्रामीण डिपो तथा सबसे कम 2 देहरादून पर्वतीय व 4 कोटद्वार डिपो में शामिल की गयी हैै। अन्य डिपो में शामिल नयी बसों मंे काशीपुर व ऋषिकेश में 15-15, अल्मोड़ा व पिथौैरागढ़ में 5-5, काठगोदाम व हल्द्वानी में 16-16, रामनगर में 12, हरिद्वार में 20, रूद्रपुर में 14, टनकपुर में 22 तथा रूड़की डिपो में 10 बसें शामिल हैं। 1 जनवरी 2020 से सूचना उपलब्ध कराने तिथि तक (5 मार्च 2022 तक) कुल 326 बसोें को संचालन से हटाया गया हैै। इसमें हल्द्वानी डिपो से 21, देहरादून के डिपो से 47, टनकपुर से 51, ऋषिकेश से 10, हरिद्वार से 71, काठगोदाम से 52, रूद्रपुर से 18 तथा काशीपुर से 19 तथा रामनगर व देहरादून पर्वतीय डिपो से 10-10, कोटद्वार से 8 व रूड़की डिपो से 9 बसों को संचालन से हटाया गया हैै।
सेना प्रमुख ने डोगरा रेजीमेंट को राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त ध्वज भेंट किए
सेना प्रमुख ने डोगरा रेजीमेंट को राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त ध्वज भेंट किए
प0नि0ब्यूरो
पफैजाबाद। थल सेनाध्यक्ष जनरल एम0एम0 नरवणे ने डोगरा रेजिमेंटल सेंटर में आयोजित एक पारम्परिक ध्वज प्रस्तुति परेड के दौरान डोगरा रेजिमेंट की दो बटालियनों 20 डोगरा और 21 डोगरा को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त ध्वज भेंट किए।
परेड का निरीक्षण करने के बाद सेना प्रमुख ने सैन्य गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में डोगरा रेजिमेंट की समृद्व परंपराओं की सराहना की, जिसमें संचालन, प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों में हिस्सा लेना भी शामिल है। सेना प्रमुख ने कम समय में उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए नवगठित इकाइयों की भी सराहना की और सभी रैंकों को गर्व के साथ राष्ट्र की सेवा करने के लिए शुभकामनाएं दीं।
राष्ट्रपति ध्वज प्रदान करने के दौरान आयोजित परेड को जनरल एन0सी0 विज (सेवानिवृत्त) पूर्व सेनाध्यक्ष और डोगरा रेजिमेंट के मानद कर्नल, दक्षिणी कमान तथा मध्य कमान के सेना कमांडरों के साथ बड़ी संख्या में सेवारत एवं सेवानिवृत्त कर्मियों ने भी देखा।
कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने की राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) से शिष्टाचार भेंट
कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने की राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) से शिष्टाचार भेंट
यूपीआई से पेमेंट करते समय याद रखने वाली बातें
यूपीआई ऐप का इस्तेमाल करने वाले भूलकर भी न करें गलतियां
यूपीआई से पेमेंट करते समय याद रखने वाली बातें
प0नि0डेस्क
देहरादून। बिल भरने से लेकर टिकट बुक करने तक आज हम सभी आमतौर पर यूपीआई ऐप, नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं। किराने की दुकान हो, सब्जी का ठेला हो या फिर शापिंग माल आजकल हर जगह आनलाइन पेमेंट की सुविधा है। हम इन तरीकों के माध्यम से पैसे ट्रांसफर या प्राप्त भी करते हैं जो हमारे जीवन को आसान बनाते हैं और समय की बचत भी कर सकते हैं।
जहां एक ओर डिजिटल भुगतान के तरीके बढ़ रहे हैं, वहीं साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। जालसाज पैसे चुराने के नए-नए तरीके खोज रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत में साइबर अपराधों की संख्या में तेजी से वृद्वि हुई है। अगर आप भी डिजिटल पेमेंट ऐप यूज कर रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें। ऐसा करके आप धोखाधड़ी से बचेंगे और सुरक्षित पेमेंट भी कर पाएंगे।
यूपीआई पेमेंट करते हैं तो यह बातें याद रखनी चाहिये-
अपना यूपीआई ऐप अपडेट रखेंः साइबर अपराधियों से सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर अपना यूपीआई ऐप अपडेट करते रहना चाहिए। साइबर सुरक्षा को बढ़ाने के लिए कंपनियां हर अपडेट के साथ नए फीचर्स देती हैं। ऐसे में यूपीआई ऐप को हमेशा अपडेट रखें।
पेमेंट प्राप्त करने के लिए पिन दर्ज न करेंः किसी भी यूपीआई ऐप में यूजर को पैसे प्राप्त करने के लिए अपना पिन दर्ज करने की जरूरत नहीं होती है। इसलिए यदि कोई आपको पैसे भेजते समय पिन डालने के लिए कह रहा है तो सावधान रहें।
प्रफाड काल्स से सावधानः साइबर अपराधी न सिर्फ लोगों को लिंक भेजकर उनके पैसे चुराने की कोशिश करते हैं, बल्कि वे सीधे यूजर्स को काल भी करते हैं। उनसे उनके पासवर्ड, पिन आदि के बारे में पूछते हैं। याद रखें कि बैंक काल पर इस तरह की डिटेल्स नहीं मांगते हैं। आपको ऐसी किसी भी काल के झांसे में नहीं आना चाहिए।
किसी भी प्रकार के लिंक पर क्लिक न करें और पिन न डालेंः लोगों को मेल और व्हाट्सऐप पर आकर्षक आफर मिलते हैं, खासकर त्योहारों के मौसम में। इस तरह के लिंक आपको गिफ्रट या कैशबैक प्राप्त करने के लिए अपना पिन और अन्य डिटेल्स दर्ज करने के लिए कहते हैं। ऐसे लिंक्स से सावधान रहना चाहिए और उन्हें नहीं खोलना चाहिए।
मजबूत पासवर्ड बनाएंः यूपीआई सर्विस के लिए रजिस्ट्रेशन करते समय एक मजबूत पिन सेट करें। ऐसा पिन बनाएं जिसका कोई आसानी से अनुमान न लगा सके। यूपीआई पिन में आमतौर पर चार या छह अंक होते हैं।
डा0 दर्शना जोशी को वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया पुरस्कार
डा0 दर्शना जोशी को वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया पुरस्कार
नीति आयोग द्वारा पुरूस्कार के पांचवें संस्करण में सम्मा
नित किया गया
संवाददाता
अल्मोड़ा। उत्तराखंड की विज्ञानशाला की संस्थापक और सीईओ डा0 दर्शना जोशी नीति आयोग द्वारा वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया के तौर पर सम्मानित 75 महिलाओं में शामिल हैं।
भारत को एक सशक्त और समर्थ भारत बनाने में महिलाएं लगातार अहम भूमिका निभाती रही हैं। विभिन्न क्षेत्रों में इन महिलाओं की उल्लेखनीय उपलब्धियों को मान्यता देते हुए नीति आयोग ने वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया पुरस्कारों की स्थापना की है।
इस साल भारत की स्वतंत्रता का 75वां वर्ष मनाने के लिए, आजादी के अमृत महोत्सव के हिस्से के तौर पर 75 महिलाओं को डब्ल्यूटीआई पुरस्कार प्रदान किए गए। अन्य पुरस्कार विजेताओं के बारे में ज्यादा जानने के लिए यहां क्लिक करें।
विज्ञानशाला की संस्थापक और सीईओ डा0 दर्शना जोशी स्टेम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) शिक्षा में समानता और पूरे भारत में सबसे अधिक हाशिए पर बैठे समुदायों के लिए अवसर पैदा करने को लेकर दृढ़ संकल्पित हैं। ख़ासी सावधानी से विकसित इकोसिस्टम गैर-बराबरी को कम कर सकते हैं और स्टेम में करियर बनाने के लिए हाशिए पर बैठे वर्गों का उत्थान कर सकते हैं। उनका ये संगठन कल्पना- शी फॉर स्टेम द्वारा स्टेम अवसर में फर्क को संबोधित करते हुए एक खास फि-जिटल इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है।
ये एक डिजिटल मेंटरशिप प्रोग्राम है जो महिलाओं के लिए वैज्ञानिक अवसर लाता है और उनके फेलोशिप मॉडल के हिस्से के रूप में ग्रामीण स्टेम चैंपियन बनाता है। इस पहल के एक हिस्से के रूप में ग्रामीण स्टेम स्नातकों को भौतिक विज्ञान प्रयोगशालाएं प्रदान की गई हैं जो उन्हें पूर्ण समर्थन और मेंटरशिप के तहत अभिनव मॉडलों पर काम करने में मदद करती हैं। विज्ञानशाला ने ज्ञान और प्रेरणा की एक पाइपलाइन बनाई है जो ग्रामीण कॉलेजों को वैश्विक मेंटरों से जोड़ती है और उन्हें प्रयोगशाला का अनुभव और नेतृत्व प्रशिक्षण प्रदान करती है।
विज्ञान के माध्यम से एक बेहतर दुनिया बना रही इस विज्ञानशाला का मिशन, इनोवेटर्स को स्टेम करियर में अपने सपनों को हासिल करने में सक्षम बनाना है।
डा0 दर्शना जोशी अल्मोड़ा विज्ञानशाला इंटरनेशनल
सीआईआई उत्तरी क्षेत्र को 2022-23 के लिए नए पदाधिकारी मिले
सीआईआई उत्तरी क्षेत्र को 2022-23 के लिए नए पदाधिकारी मिले
अंशुमन मैगजीन सीआईआई उत्तरी क्षेत्र के अध्यक्ष तो दीपक जैन उपाध्यक्ष निर्वाचित
संवाददाता
देहरादून। अंशुमन मैगजीन और दीपक जैन को 2021-22 के लिए सीआईआई उत्तरी क्षेत्र का क्रमश अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुना गया है। नवनिर्वाचित क्षेत्रीय परिषद सदस्यों की पहली बैठक के दौरान पदाधारियों का चुनाव किया गया। मुंजाल सीआईआई उत्तरी क्षेत्र के प्रमुख होंगे जिसमें 7 राज्य उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और 3 केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं।
अंशुमन मैगजीन सीबीआरई में भारत, दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अप्रफीका के अध्यक्ष और सीईओ हैं। वह 25 देशों और 50 से अधिक कार्यालयों और सहयोगियों के लिए संचालन की देखभाल करते हैं। इस भूमिका में वह सीबीआरई की सलाहकार और लेनदेन सेवाओं, वैश्विक कार्यस्थल समाधान और संपत्ति प्रबंधन, पूंजी बाजार, परियोजना प्रबंधन, परामर्श और मूल्यांकन व्यवसायों के लिए भारत, दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अप्रफीका के लिए जिम्मेदार हैं।
भारत में वह 26 सरकारी स्वामित्व वाली आतिथ्य परिसंपत्तियों के पोर्टफोलियो के लिए विनिवेश अभ्यास, हवाई अड्ढों के निजीकरण और विभिन्न अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं सहित कुछ सबसे बड़े और सबसे प्रतिष्ठित सलाहकार कार्यों में शामिल रहे हैं। विश्व स्तर पर उन्होंने अपने भारत संचालन की स्थापना और सफलतापूर्वक चलाने में बड़ी संख्या में बहुराष्ट्रीय निगमों की सहायता करने में एक प्रमुख भूमिका निभाई है।
2022-23 के लिए प्राथमिकताओं के बारे में मैगजीन ने कहा कि अमृत काल में प्रवेश करने के बाद सीआईआई उत्तरी क्षेत्र का उद्देश्य सरकार को एक सूक्ष्म आर्थिक स्तर के सभी समावेशी कल्याण फोकस के साथ व्यापक आर्थिक स्तर के विकास फोकस के पूरक के अपने दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना है। डिजिटल अर्थव्यवस्था और फिनटेक, प्रौद्योगिकी-सक्षम विकास, ऊर्जा संक्रमण और जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा देना और निजी निवेश पर निर्भर करना भी एक महत्वपूर्ण फोकस क्षेत्र होगा।
मैगजीन ने वर्ष 2022-23 के लिए सीआईआई उत्तरी क्षेत्र के लिए 8 प्राथमिक क्षेत्रों को सूचीबद्व किया जिसमें नीति वकालत, व्यवसाय करने में आसानी और लागत, डैड की प्रतिस्पर्धात्मकता, निवेश की सुविधा, भौतिक व सामाजिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, उद्यमिता, स्टार्टअप और कौशल विकास, पर्यावरण स्थिरता और पानी शामिल हैं।
दीपक जैन ल्यूमैक्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं। ल्यूमैक्स-डीके जैन समूह की प्रमुख कंपनी है, जो भारत में आटोमोटिव कंपोनेंट्स और सिस्टम्स का एक अग्रणी निर्माता है, जो लाइटिंग और गियर शिफ्रटर सिस्टम्स में मार्केट लीडर्स के साथ है।
ल्यूमैक्स समूह में 8 राज्यों में फैले 34 विनिर्माण स्थानों के साथ 15 कंपनियां शामिल हैं, साथ ही ताइवान और चेक गणराज्य में तीन सरकारी मान्यता प्राप्त अनुसंधान और विकास केंद्र और विदेशी डिजाइन केंद्र भी शामिल हैं।
दीपक जैन सीआईआई एनआर क्षेत्र के उन्नत विनिर्माण पर क्षेत्रीय समिति के अध्यक्ष हैं, आटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन आफ इंडिया के तत्काल पूर्व अध्यक्ष (2019-2021), टोयोटा किर्लाेस्कर सप्लायर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष, कार्यकारी परिषद के सदस्य मारुति सुजुकी सप्लायर वेलफेयर एसोसिएशन, टाटा मोटर्स सप्लायर्स काउंसिल और इंटरनेशनल सेंटर फार आटोमोटिव टेक्नोलाजी रिसर्च एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य है।
मंगलवार, 22 मार्च 2022
जिया ने रिकार्ड समय में पलक जलडमरूमध्य पार किया
जिया ने रिकार्ड समय में पलक जलडमरूमध्य पार किया
नेवी चिल्ड्रन स्कूल (मुंबई) की छात्रा जिया राय की उपलब्धि
एजेंसी
मुंबई। भारतीय नौसेना के वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारी एवं आईएनएस कुंजली पर एमसी-एटी-एआरएमएस-प्प् मदन राय की बेटी और नेवी चिल्ड्रन स्कूल मुंबई की छात्रा मिस जिया राय ने पलक जलडमरूमध्य में तलाईमन्नार से (श्रीलंका) से धनुषकोडी (भारत) तक 29 किलोमीटर की दूरी को 13 घंटे 10 मिनट में तैरकर देश का नाम रौशन किया।
आटिज्म स्पेक्ट्रम डिसआर्डर से पीड़ित इस बच्ची ने 13 साल और 10 महीने की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही वह पलक जलडमरूमध्य में तैरने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की और सबसे तेज महिला तैराक बन गई है। इससे पहले यह रिकार्ड सुश्री बुला चौधरी के नाम था, जिन्होंने 2004 में 13 घंटे 52 मिनट में दूरी तय की थी।
यह आयोजन पैरा स्विमिंग फेडरेशन आफ इंडिया (पीएसएपफआई) द्वारा स्विमिंग फेडरेशन आफ इंडिया तमिलनाडु की स्पोर्ट्स डेवलपमेंट अथारिटी और आटिज्म सोसाइटी आफ इंडिया सहित कई एजेंसियों के सहयोग से किया गया था। गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने इस आयोजन के लिए बच्ची को वित्तीय पारितोषिक प्रदान किया।
इस आयोजन के दौरान श्रीलंकाई नौसेना ने श्रीलंकाई जल क्षेत्र में तलाश और बचाव कवर प्रदान किया, जबकि भारतीय नौसेना तथा तटरक्षक बल ने भारतीय जल धारा में इसी तरह की सहायता प्रदान की।
पश्चिमी नौसेना कमान के फ्रलैग आफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल अजेंद्र बहादुर सिंह पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम, एडीसी ने सुश्री जिया राय और उनके माता-पिता को इस शानदार उपलब्धि पर बधाई दी।
प्रतिष्ठित प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार-2022 सहित कई पुरस्कारों की प्राप्तकर्ता मिस जिया राय दुनिया के सभी महासागरों में तैरने के मिशन पर हैं। वास्तव में वह एक सच्ची चैंपियन हैं।
सोमवार, 21 मार्च 2022
इलाज से पहले अब पूर्व सैनिकों को नहीं लेनी होगी मंजूरी
इलाज से पहले अब पूर्व सैनिकों को नहीं लेनी होगी मंजूरी
ईसीएचएस पालीक्लीनिक प्रभारी कर्नल सतीश कटोच के मुताबिक उपचार व रेफरल की यह सुविधा बिना किसी कागजी कार्रवाई के दी गई
एजेंसी
हमीरपुर। भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के लाभार्थी अब देशभर के किसी भी पालीक्लीनिक में उपचार ले सकेंगे। ईसीएचएस सेंट्रल आर्गेनाइजेशन ने बिना किसी झंझट के उपचार व रेफरल लेने की सुविधा दी है। अब ईसीएचएस के लाभार्थियों को अन्य शहर में उपचार करवाने के लिए कोई दस्तावेजी संबंधी कार्रवाई नहीं करनी पड़ेगी। वे सीधे दूसरे शहर के ईसीएचएस पालीक्लीनिक में जाकर उपचार व रेफरल ले सकेंगे।
इससे पूर्व लाभार्थियों को दूसरे शहर में उपचार के लिए दोनों तरफ के पालीक्लीनिकों को ईमेल कर अस्थायी अटैचमेंट की स्वीकृति लेनी पड़ती थी। इसमें लाभार्थियों का समय नष्ट होता था और कई बार समय पर उपचार की सुविधा न मिलने से मरीज की तबीयत ज्यादा बिगड़ जाती थी। अब ईसीएचएस सेंट्रल आर्गेनाइजेशन से इन औपचारिकताओं को समाप्त करते हुए लाभार्थियों को देश के किसी भी पालीक्लीनिक में बिना किसी ईमेल या स्वीकृति दस्तावेज के सीधे तौर पर इलाज की सुविधा दी है।
इससे अपने रिश्तेदारों या बच्चों के पास दूसरे शहरों में जाने वाले पूर्व सैनिकों, आश्रितों व वीरनारियों को लाभ मिलेगा।
प्रोटेम स्पीकर बंशीधर भगत ने विधायकों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई
नवनिर्वाचित सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह विधानसभा भवन में आहूत
उपभोक्ताओं की जेब होगी ढीली
उपभोक्ताओं की जेब होगी ढीली
10 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले उत्पादों के दाम
एजेंसी
नयी दिल्ली। उपभोक्ताओं को अब दैनिक इस्तेमाल के उत्पादों के लिए अपनी जेब अधिक ढीली करनी पड़ सकती है। गेहूं, पाम तेल और पैकेजिंग सामान जैसे जिंसों के दामों में उछाल की वजह से एपफएमसीजी कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की तैयारी कर रही हैं। इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्व की वजह से भी एफएमसीजी कंपनियों को झटका लगा है। उनका मानना है कि इसके चलते, गेहूं, खाद्य तेल और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आएगा।
डाबर और पारले जैसी कंपनियों की स्थिति पर नजर है और वे मुद्रास्फीतिक दबाव से निपटने के लिए सोच-विचार कर कदम उठाएंगी। कुछ मीडिया खबरों में कहा गया है कि हिंदुस्तान यूनिलीवर और नेस्ले ने पिछले सप्ताह अपने खाद्य उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं। पारले प्रोडक्ट्स के वरिष्ठ श्रेणी प्रमुख मयंक शाह ने कहा कि हम उद्योग द्वारा कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्वि की उम्मीद कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव है। ऐसे में अभी तक कहना मुश्किल है कि मूल्यवृद्वि कितनी होगी। उन्होंने बताया कि पाम तेल का दाम 180 रुपये लीटर तक चला गया था। अब यह 150 रुपये लीटर पर आ गया है। इसी तरह कच्चे तेल का दाम 140 डालर प्रति बैरल पर जाने के बाद 100 डालर से नीचे आ गया है।
शाह ने कहा कि हालांकि कीमतें अब भी पहले की तुलना में ऊंची हैं। पिछली बार एफएमसीजी कंपनियों ने पूरी तरह जिंस कीमतों में वृद्वि का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला था। शाह ने कहा कि अब सभी 10-15 प्रतिशत वृद्वि की बात कर रहे हैं। हालांकि उत्पादन की लागत कहीं अधिक बढ़ी है। उन्होंने कहा कि अभी पारले के पास पर्याप्त स्टाक है। कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला एक या दो माह में लिया जाएगा।
डाबर इंडिया के मुख्य वित्त अधिकारी अंकुश जैन ने कहा कि मुद्रास्फीति लगातार ऊंची बनी हुई है और यह लगातार दूसरे साल चिंता की वजह है। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीतिक दबाव की वजह से उपभोक्ताओं ने अपना खर्च कम किया है। वे छोटे पैक खरीद रहे हैं। हमारी स्थिति पर नजर है और सोच-विचार के बाद मुद्रास्फीतिक दबाव से बचाव के उपाय करेंगे।
एडलवाइस फाइनेंशियल सर्विसेज के कार्यकारी उपाध्यक्ष अबनीश राय ने कहा कि एफएमसीजी कंपनियां मुद्रास्फीति का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान यूनिलीवर और नेस्ले के पास ऊंचा मूल्य तय करने की ताकत है। वे काफी और पैकेजिंग सामान की मूल्यवृद्धि का बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं। हमारा अनुमान है कि सभी एफएमसीजी कंपनियां 2022-23 की पहली तिमाही में कीमतों में 3 से 5 प्रतिशत की वृद्वि करेंगी।
मीडिया की खबरों में कहा गया है कि हिंदुस्तान यूनिलीवर और नेस्ले जैसी कंपनियों ने पहले ही चाय, काफी और नूडल्स के दाम बढ़ा दिए हैं। इन कंपनियों ने जिंस कीमतों में बढ़ोतरी का कुछ बोझ उपभोक्ताओं पर डाला है।
सीमा सड़क संगठन की असाधारण उपलब्धि
जोजिला पास बंद होने के मात्र 73 दिन बाद श्रीनगर-कारगिल-लेह सड़क यातायात हेतु खोला गया
सीमा सड़क संगठन की असाधारण उपलब्धि
एजेंसी
लद्दाख। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और जम्मू और कश्मीर के बीच के प्रवेश द्वार जोजिला पास 11,650 फीट की ऊंचाई पर स्थित श्रीनगर-कारगिल-लेह सड़क पर यातायात हेतु खोल दिया। बीआरओ ने इस पास को बंद होने के 73 दिन बाद ही खोल कर एक सर्वकालिक रिकार्ड बनाया। यह पहली बार है जब बीआरओ ने कठिन मौसम की स्थिति के बीच लगातार बर्फ हटाने का कार्य करते हुए 5 जनवरी तक दर्रे को खुला रखने के बाद यह उपलब्धि हासिल की है।
15 फरवरी से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में स्थित प्रोजेक्ट बीकन और विजयक द्वारा पास के दोनों ओर से बर्फ हटाने का कार्य किया गया। निरंतर प्रयासों के बाद जोजिला पास में कनेक्टिविटी शुरुआत में 4 मार्च को स्थापित की गई। इसके बाद वाहनों के सुरक्षित मार्ग को बनाने के लिए सड़क की स्थिति में सुधार करने के प्रयास किए गए। आवश्यक ताजा समान की आपूर्ति करने वाले वाहनों के पहले काफिले ने जोजिला पास के पार जाकर लद्दाख के लोगों को बहुत आवश्यक राहत दी एवं कारगिल पहुंचा। आमतौर पर भारी हिमपात के कारण सर्दियों के दौरान जोजिला पास लगभग 160 से 180 दिनों के लिए बंद रहता था।
जोजिला पास को दोबारा खोलने के दौरान सीमा सड़क महानिदेशक (डीजीबीआर) लेफ्रिटनेंट जनरल राजीव चौधरी सहित नागरिक प्रशासन और सेना के विभिन्न गणमान्य अधिकारी मौजूद थे। प्रोजेक्ट बीकन और विजयक के प्रयासों की सराहना करते हुए सीमा सड़क संगठन के महानिदेशक (डीजीबीआर) ने कहा कि जोजिला पास के जल्द खुलने से न केवल देश की रक्षा तैयारियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि लद्दाख के लोगों तक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में भी सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि पास के खुलने से बीआरओ को लद्दाख में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री का स्टाक करने में मदद मिलेगी।
रविवार, 20 मार्च 2022
बाबा बालकनाथ जी का झंडारोहण एवं विशाल भंडारे का आयोजन
चंद्रबनी में श्री गंगा उद्धार सेवा समिति द्वारा विशेष पूजा अर्चना
अमेरिकी परियोजना एमसीसी को लेकर बवाल
अमेरिकी परियोजना एमसीसी को लेकर बवाल
परियोजना को पारित कराने के लिए अमेरिका का दबाव और चीन कर रहा कड़ा विरोध
प0नि0ब्यूरो
काठमांडू। नेपाल में मिलेनियम चैलेंज कोऑपरेशन (एमसीसी)को लेकर सत्तारूढ गठबंधन में मतभेद आ गया है। नेपाली प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने अमेरिकी परियोजना एमसीसी को हर हाल में संसद से पारित कराने का अल्टीमेटम दे दिया है, वहीं चीन ने इस परियोजना को संसद से पारित नहीं करवाने के लिए दबाब बनाना शुरू कर दिया है। नेपाल के प्रधानमंत्री देउबा ने सत्ता में साझेदार कम्यूनिस्ट पार्टियों से कह दिया है कि संसद के मौजूदा सत्र से एमसीसी पारित करवाने में वे उनकी मदद करें। ऐसा नहीं होने पर वह गठबंधन तोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे।
देउबा सरकार को समर्थन कर रहे माओवादी और नेकपाएस जैसी वामपंथी दलों ने गठबंधन की बैठक में पीएम को स्पष्ट कर दिया कि अमेरिकी परियोजना चीन के विरूद्ध लक्षित है इसलिए इसको संसद से पास नहीं कराना चाहिए। इस पर जब पीएम देउबा ने कहा कि अगर सत्तारूढ दल इसमें उनका साथ नहीं देगा तो मजबूरन उन्हें विपक्ष का समर्थन लेना होगा। इस स्टैंड पर चीन समर्थित दल माओवादी, नेकपाएस और जनता समाजवादी पार्टी ने कह दिया कि सरकार रहे या जाए गठबंधन टूटे या रहे, लेकिन एमसीसी किसी कीमत में पारित नहीं होगा।
नेपाल की संसद के स्पीकर अग्नि सापकोटा माओवादी पार्टी से आते हैं इसलिए प्रचंड के कहने पर बिना पीएम की जानकारी के संसद की बैठक को 10 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस बात का खुलासा हुआ है कि जब प्रधानमंत्री के सरकारी निवास में एमसीसी पास करने को लेकर गठबंधन की बैठक चल रही थी उससे पहले ही माओवादी के अध्यक्ष प्रचंड चीन में सत्तारूढ कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ चीन के विदेश विभाग प्रमुख सांग ताओ से वीडियो कांफ्रेंस में बात करते आए हैं।
सूत्रों के मुताबिक चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के इंटरनेशनल डिपार्टमेंट के हेड सांग ताओ ने एमसीसी परियोजना को किसी भी हालत में संसद में पेश नहीं होने देने के लिए दबाब डाला है। वैसे यह पहली बार नहीं है जब चीन का खुला हस्तक्षेप नेपाल के आंतरिक मामलों में हो रहा है। इससे पहले भी सार्वजनिक रूप से और नेपाल के राजनीतिक दल के प्रमुख नेताओं के साथ चीन ने किसी भी हालत में अमेरिकी परियोजना को रोकने का दबाब बनाया है। चीन का मानना है कि एमसीसी परियोजना के जरिये दरअसल चीन की घेराबंदी करने के लिए नेपाल को 55 मिलियन डॉलर का ग्रांट दिया जा रहा है। चीन को आशंका है कि एमसीसी के जरिए अमेरिका नेपाल में अपना सैन्य बेस बनाना चाहती है और यहां से वो तिब्बत को अशांत करने की उसकी योजना है।
एनएमडीसी ने लौह अयस्क के उत्पादन का इतिहास रचा
एनएमडीसी ने लौह अयस्क के उत्पादन का इतिहास रचा
एक साल में 40 मिलियन टन से ज्यादा लौह अयस्क का उत्पादन करने वाली देश की पहली कंपनी बनी
एजेंसी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय खनिज विकास निगम लिमिटेड (एनएमडीसी) एक साल में 40 मिलियन टन (एमटी) से ज्यादा लौह अयस्क का उत्पादन करने वाली देश की पहली कंपनी बन गई है। देश का सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक इस्पात मंत्रालय के तहत कार्यरत एक सीपीएसई है। 1960 के दशक के अंत में 4 एमटीपीए के उत्पादन से लेकर अब 40 मिलियन टन तक देश के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक कंपनी की प्रगति असाधारण रही है। 1969-70 में 4 मिलियन टन से शुरू होकर एनएमडीसी ने 1977-78 में 10 मिलियन टन के आंकड़े को पार किया। 2004-05 तक इसने एक और 10 मिलियन को जोड़ा। एक दशक के भीतर 30 मिलियन टन को पार किया और अब 40 मिलियन के आंकड़े के पार पहुंच गया है।
घरेलू लौह अयस्क की मांग में निरंतर वृद्वि के साथ तालमेल बिठाते हुए कंपनी उत्पादन बढ़ाने की कोशिश में महत्वाकांक्षी विस्तार योजनाओं और पूंजीगत खर्च कर रही है। हाल के समय में एनएमडीसी ने अत्याधुनिक तकनीक को अपनाया है और कोविड के चलते आई सुस्ती और क्षेत्र में अस्थिरता को दूर करने के लिए एक परिवर्तनकारी डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार किया है। स्केल से स्ट्रेंथ तक आगे बढ़ते हुए कंपनी ने बुनियादी सिद्वांतों और दूरदर्शी कार्यबल के सामर्थ्य से 40 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन का मील का पत्थर तय किया है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर टीम को बधाई देते हुए सुमित देब अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एनएमडीसी ने कहा कि भारत में 40 एमटी को पार करने वाली पहली लौह अयस्क खनन कंपनी बनने की एनएमडीसी की अभूतपूर्व उपलब्धि सभी बाधाओं के बावजूद चुनौतियों को स्वीकार करने की क्षमता का एक शानदार प्रदर्शन है। कंपनी की दृढ़ता और स्थिरता ने सफलता दिलाई है और मैं इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए टीम को बधाई देता हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि हम देश के आत्मनिर्भर भारत के विजन को पूरा करने के लिए अपने रास्ते में कई और मील के पत्थर को पार करना जारी रखेंगे। यह उपलब्धि दर्शाती है कि हम 2030 तक 100 एमटीपीए वाली कंपनी बनने की राह पर हैं।
यहां उल्लेखनीय है कि कंपनी ने 2030 तक 100 एमटीपीए कंपनी बनने का लक्ष्य रखा है। सीपीएसई ने अपने पोर्टफोलियो में कोयला, हीरा, सोना और राष्ट्रीय हित के अन्य रणनीतिक खनिजों के साथ बहु-खनिज दृष्टिकोण की ओर बढ़ने में अपनी विशेषज्ञता का लाभ उठाने की भी योजना बनाई है।
शनिवार, 19 मार्च 2022
घोषणा के तीन साल बाद भी नहीं मिली जवानों को सौ दिन की छुट्टी
सीआरपीएफ में कैडर, पदोन्नति और 100 दिन की छुट्टियों पर फंसा पेंच
घोषणा के तीन साल बाद भी नहीं मिली जवानों को सौ दिन की छुट्टी
एजेंसी
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2019 के आखिर में घोषणा की थी कि सीएपीएफ के सभी जवानों को एक साल में 100 दिन की छुट्टी मिलेगी। यह फार्मूला फेल हो गया है। ढाई साल बाद भी यह तय नहीं हो सका है कि उक्त छुट्टियां कैसे दी जानी है। देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ में कैडर, अधिकारियों की पदोन्नति और जवानों को एक साल में सौ दिन की छुट्टी, पर पेंच फंस गया है। सीआरपीएफ में अनेक समस्याओं का निदान नहीं हो सका है। ग्राउंड कमांडरों से आईजी/एडीजी रैंक दूर होता जा रहा है। प्रमोशन का पहला पायदान मिलने में ही 12 से 15 साल लग रहे हैं। जवानों को सौ दिन की छुट्टी की घोषणा को तीसरा साल हो गया, अभी तक लागू नहीं हो सकी है।
कायदे से सीआरपीएफ में कैडर समीक्षा अब तक पूरी हो जानी चाहिए थी, मगर ऐसा नहीं हुआ। 5 साल में होने वाले कैडर रिव्यू प्रपोजल को पिछली बार 29 जून 2016 को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई थी। कैडर रिव्यू कमेटी की बैठक 15 दिसंबर 2015 को हुई थी। इस हिसाब से गत वर्ष यह प्रकिया पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन इस बार कैडर रिव्यू प्रपोजल पिछले दिनों ही केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा गया है। हालांकि डीओपीटी की कैडर रिव्यू डिवीजन की प्रक्रिया रिपोर्ट कुछ और ही बताती है।
वेबसाइट पर डाली गई एक जनवरी 2016 से 28 फरवरी 2022 तक की रिपोर्ट में सीआरपीएफ कैडर रिव्यू का कहीं कोई जिक्र ही नहीं है। अफसरों को समय पर प्रमोशन न मिलने के कारण वे जाब छोड़ रहे हैं। जब पहला प्रमोशन 15 साल में मिलेगा तो उसके बाद डीसी, टूआईसी, कमांडेंट व डीआईजी के पद से होते हुए आईजी, एडीजी तक कोई कैसे पहुंचेगा। आईपीएस की तरह कैडर अफसरों को टाइम बाउंड प्रमोशन नहीं मिलता।
इस बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में डीजी कुलदीप सिंह ने कहा कि हमने कैडर रिव्यू प्रपोजल गृह मंत्रालय में भेज दिया है। बता दें कि गृह मंत्रालय में भेजे गए प्रपोजल में कई तरह की कांट-छांट होती है। उसके बाद वह प्रपोजल कैडर रिव्यू कमेटी के पास जाता है। वहां से पास होने के बाद वह फाइल वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग में जाती है। अगर यहां से उसे मंजूरी मिलती है तो ही कैडर रिव्यू प्रपोजल केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रस्तुत किया जाता है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद उसे लागू कर दिया जाता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभी इस प्रक्रिया में कितना और समय लग सकता है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2019 के आखिर में घोषणा की थी कि सभी जवानों को एक साल में 100 दिन की छुट्टी मिलेगी। वह फार्मूला फेल हो गया है। अब तक यह तय नहीं हो सका है कि ये छुट्टियां कैसे देनी हैं। पैरामिलिट्री फोर्स में जवानों के मानसिक तनाव को दूर करने के लिए बल के कैप्सूल कोर्स बेमानी साबित हो रहे हैं। जवान को 60 दिन की छुट्टी तो वैसे ही मिलती है। सीएल को जोड़ें तो वह संख्या 80 तक पहुंच जाती है। अब बाकी की छुट्टियां कैसे मिलें, इस पर मंथन हो रही है। बल में आवासीय क्षमता को बढ़ाया जा रहा है, इसलिए भी देर हो रही है।
मालन पुल के मरम्मत का कार्य धीमी गति से होेने पर विधानसभा अध्यक्ष ने नाराजगी जतायी
मालन पुल के मरम्मत का कार्य धीमी गति से होेने पर विधानसभा अध्यक्ष ने नाराजगी जतायी संवाददाता देहरादून। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण न...

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माईगव हेल्पडेस्क पर डिजिलाकर सेवाओं का उपयोग व्हाट्सएप उपयोगकर्ता $91 9013151515 पर केवल नमस्ते या हाय या डिजिलाकर भेजकर कर सकते है चैटबाट...
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तेल को बार-बार गर्म करना खतरनाक री-हीट करने से तेल में विषैले पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है प0नि0डेस्क देहरादून। तेल भारतीय पाक शैली का प्रम...